हम तय करेंगे मुफ्त चुनावी वादे में क्या सही: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मुफ्त सौगात की परिभाषा क्या है, यह फैसला सर्वोच्च अदालत करेगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने सभी पक्षों से कहा कि वे शनिवार तक अपने सुझाव कोर्ट को दे दें। मामले की सुनवाई सोमवार को होगी।

राजनीतिक दलों को मुफ्त सौगात के वादों की अनुमति नहीं देने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उठाए गए मुद्दे तेजी से जटिल होते जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हम फैसला करेंगे कि मुफ्त की सौगात क्या है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि क्या सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, पीने के पानी और शिक्षा तक पहुंच को मुफ्त सौगात माना जा सकता है। हमें यह परिभाषित करने की आवश्यकता है कि एक मुफ्त सौगात (फ्रीबीज) क्या है। क्या हम किसानों को मुफ्त में खाद, बच्चों को मुफ्त शिक्षा के वादे को मुफ्त सौगात कह सकते हैं।
सार्वजनिक धन खर्च करने का सही तरीका क्या है, इसे देखना होगा। हम राजनीतिक दलों को वादे करने से नहीं रोक सकते। सवाल यह है कि सही वादे क्या होते हैं, क्या हम मुफ्त शिक्षा के वादे को एक मुफ्त सौगात के रूप में वर्णित कर सकते हैं। क्या मुफ्त पेयजल, शक्तियों की न्यूनतम आवश्यक इकाइयों आदि को फ्रीबीज के रूप में वर्णित किया जा सकता है। क्या उपभोक्ता उत्पाद और मुफ्त इलेक्ट्रॉनिक्स को कल्याण के रूप में वर्णित कर सकते हैं।
कई राजनीतिक दलों ने की है दखल की मांग
कोर्ट ने कहा कि आज चिंता यह है कि जनता के पैसे खर्च करने का सही तरीका क्या है। कुछ लोग कहते हैं कि पैसा बर्बाद हो गया है, कुछ लोग कहते हैं कि यह कल्याण कार्य है। मुद्दे तेजी से जटिल हो रहे हैं। उच्चतम न्यायालय भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका दायर पर विचार कर रही है। आप, मध्य प्रदेश कांग्रेस और द्रमुक जैसे राजनीतिक दलों ने मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
केंद्र ने जताई चिंता
केंद्र ने कहा कि मुफ्त देने की एक सीमा होनी चाहिए, नहीं तो ऐसे फैसले आर्थिक आपदा का कारण हो सकते हैं।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मुफ्त सौगात की परिभाषा क्या है, यह फैसला सर्वोच्च अदालत करेगी। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने सभी पक्षों से कहा कि वे शनिवार तक अपने सुझाव कोर्ट को दे दें। मामले की सुनवाई सोमवार को होगी।
राजनीतिक दलों को मुफ्त सौगात के वादों की अनुमति नहीं देने की मांग वाली याचिका पर विचार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इस मामले में उठाए गए मुद्दे तेजी से जटिल होते जा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हम फैसला करेंगे कि मुफ्त की सौगात क्या है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि क्या सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, पीने के पानी और शिक्षा तक पहुंच को मुफ्त सौगात माना जा सकता है। हमें यह परिभाषित करने की आवश्यकता है कि एक मुफ्त सौगात (फ्रीबीज) क्या है। क्या हम किसानों को मुफ्त में खाद, बच्चों को मुफ्त शिक्षा के वादे को मुफ्त सौगात कह सकते हैं।
सार्वजनिक धन खर्च करने का सही तरीका क्या है, इसे देखना होगा। हम राजनीतिक दलों को वादे करने से नहीं रोक सकते। सवाल यह है कि सही वादे क्या होते हैं, क्या हम मुफ्त शिक्षा के वादे को एक मुफ्त सौगात के रूप में वर्णित कर सकते हैं। क्या मुफ्त पेयजल, शक्तियों की न्यूनतम आवश्यक इकाइयों आदि को फ्रीबीज के रूप में वर्णित किया जा सकता है। क्या उपभोक्ता उत्पाद और मुफ्त इलेक्ट्रॉनिक्स को कल्याण के रूप में वर्णित कर सकते हैं।

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