छुट्टी से प्रमोशन तक के लिए निदेशालय की दौड़, शिक्षक परेशान

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गोहरी में हिन्दी की सहायक अध्यापिका पूनम यादव को 22 अगस्त से 19 दिसंबर तक बाल्य देखभाल अवकाश (चाइल्ड केयर लीव) की आवश्यकता थी। अवकाश स्वीकृत कराने के लिए उन्होंने प्रिंसिपल के माध्यम से 13 अगस्त को आवेदन पत्र जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भेजा। वहां से प्रार्थना पत्र 27 अगस्त को संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय भेजा गया और फिर वहां से प्रार्थना पत्र शिक्षा निदेशालय स्थित अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक (राजकीय) कार्यालय को भेजा गया। डेढ़ महीने से अधिक बीतने के बावजूद अब तक शिक्षिका का अवकाश स्वीकृत नहीं हो सका है।

आगरा के मुन्नालाल व राजेन्द्र सिंह, मथुरा के विजय कुमार, मुकेश कश्यप व हरदम सिंह के प्रोन्नत वेतनमान और आगरा की ही सुजाता सिंह, नमिता, अंजना, मीता वर्मा, चारु सोलंकी, चेतना सिंह, पूनम बघेल, पूजा सक्सेना, शशि वर्मा, प्रेरणा सेठ व रेखा, मथुरा की खुशबू शर्मा और कल्पना सिंह के चयन वेतनमान की फाइल महीनों से लंबित पड़ी है।
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के प्रकरण जैसे बाल्यकाल देखभाल अवकाश, 30 दिन से अधिक मेडिकल अवकाश या किसी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र /अनुमति प्रमाण पत्र का निस्तारण मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशक से किया जाए। क्योंकि इनके निस्तारण में अनावश्यक विलंब होता है और प्रदेशभर के शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षा निदेशालय का चक्कर लगाना पड़ता है, जो दुरूह कार्य है।
-डॉ. रवि भूषण, महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ
प्रयागराज। ये दो उदाहरण मात्र हैं। प्रदेशभर के 2332 राजकीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों सहायक अध्यापकों और प्रवक्ताओं की परेशानी का अंत नहीं है। इन शिक्षकों को छोटे से लेकर बड़े काम तक के लिए जिले से लेकर शिक्षा निदेशालय तक का चक्कर काटना पड़ रहा है।
मंडल स्तर पर संयुक्त शिक्षा निदेशकों की तैनाती होने के बावजूद सारे छोटे-बड़े काम शिक्षा निदेशालय से होते हैं। इसी समस्या को देखते हुए शिक्षा निदेशालय में दो साल पहले इन कार्यों को मंडल स्तर पर निस्तारित करने का प्रस्ताव तैयार हुआ लेकिन शासन तक नहीं पहुंच सका।
एक साल में घूस लेते पकड़े गए दो बाबू यही कारण है कि शिक्षकों के छोटे बड़े कामों को करने के लिए शिक्षा विभाग से आए दिन रुपये मांगने की शिकायत मिलती रहती है। पिछले साल सितंबर में शिक्षा निदेशालय के प्रधान सहायक अनिल कुमार को एक शिक्षक से बकाया भुगतान के लिए 30 हजार रुपये घूस लेते हुए विजिलेंस की टीम ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। 26 सितंबर 2022 को जिला विद्यालय कार्यालय द्वितीय के वरिष्ठ सहायक रामकृष्ण मिश्रा को शिक्षिका गार्गी श्रीवास्तव से दस हजार रुपये लेते हुए विजिलेंस की टीम ने रंगेहाथ पकड़ा।

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