‘धरतीपुत्र’ का परलोक प्रस्थान:- समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का निधन, सैफई में अंतिम संस्कार आज, यूपी में तीन दिन का राजकीय शोक

समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे। अपने समर्थकों के बीच ‘नेताजी’ व ‘धरती पुत्र’ के रूप में मशहूर मुलायम सिंह यादव ने सुबह 816 बजे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली। राजकीय सम्मान के साथ मुलायम का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव सैफई में मंगलवार दोपहर तीन बजे होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत तमाम हस्तियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। मुलायम सिंह के निधन पर यूपी में तीन दिन और बिहार में एक दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री व मैनपुरी से सांसद मुलायम सिंह यादव को अगस्त में मेदांता अस्पताल में भर्ती किया गया था। दो अक्तूबर को निम्न रक्तचाप और ऑक्सीजन की कमी की शिकायत पर उन्हें अस्पताल के आईसीयू में स्थानांतरित किया गया था। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। उनके बेटे व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा कि मेरे आदरणीय पिताजी व सबके ‘नेताजी’ नहीं रहे। उनके पार्थिव शरीर को दोपहर में सै़फई ले जाया गया। वहां अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। देश भर के नेता, मुख्यमंत्री व अन्य विशिष्ट लोग उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सैफई पहुंच रहे हैं।
साधारण गांव से निकले मुलायम सिंह सियासत में आगे बढ़ते हुए तीन बार मुख्यमंत्री रहे और देश के रक्षामंत्री पद तक पहुंचे। एक वक्त वह देश के प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी माने गए थे। मुलायम कई दशकों तक एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित रहे। लेकिन, उनका सियासी अखाड़ा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश ही रहा। समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया से प्रभावित मुलायम ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुए उत्तर प्रदेश में सत्ता के शीर्ष को छुआ। वे अपने राजनीतिक सफर में 10 बार विधायक और सात बार सांसद बने। वर्ष 1967 में जसवंतनगर विधानसभा सीट से पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए। वर्ष 1996 में पहली बार मैनपुरी लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 2004, 2009, 2014 व 2019 में यहां से सांसद चुने गए। वर्ष 1999 का लोकसभा चुनाव कन्नौज सीट से जीते। वर्ष 2004 में अखिलेश के लिए यह सीट छोड़ी और वह सांसद बने। 2014 का लोकसभा चुनाव मुलायम आजमगढ़ सीट से लड़े और जीते। 2019 में सीट अखिलेश के लिए छोड़ दी। वे जब तक जीवित रहे वह सपा कार्यकर्ताओं के ‘नेताजी’ बने रहे।
अलविदा मुलायम P04,06,07
असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाले नेता
साधारण परिवेश से आए मुलायम सिंह यादव जी की उपलब्धियां असाधारण थीं। मुलायम जी जमीन से जुड़े दिग्गज नेता थे। उनका सम्मान सभी दलों के लोग करते थे।
-द्रौपदी मुर्मू, राष्ट्रपति
एक विनम्र और जमीन से जुड़े नेता को खोया
मुलायम सिंह का निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्हें एक विनम्र और जमीन से जुड़े नेता के रूप में सराहा गया। उन्होंने जेपी व लोहिया के आदर्शों को लोकप्रिय बनाया।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
समाजवादी विचारों की मुखर आवाज मौन हुई
निधन की खबर से दुखी हूं। आज समाजवादी विचारों की एक मुखर आवाज मौन हो गई। देश के रक्षा मंत्री और यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में मुलायम सिंह का योगदान अविस्मरणीय रहेगा। -सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
यूपी की राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई
राजनीति में विरोधी होने के बावजूद मुलायम सिंह के संबंध सबसे अच्छे थे। वह जमीन से जुड़े एक ऐसे नेता थे, जिन्होंने कई दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख भूमिका निभाई। -राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री
10 बार विधायक और सात बार सांसद रहे
1989, 1993 व 2003 में यूपी के सीएम बने
1996 से 1998 तक देश के रक्षा मंत्री भी रहे
एक युग का अंत योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सैफई पहुंचकर दिवंगत मुलायम सिंह यादव को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वे अंतिम संस्कार में भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से भी पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह यादव के निधन से समाजवाद के एक प्रमुख स्तंभ और एक संघर्षशील युग का अंत हो गया।
मुलायम सिंह यादव के पांच चर्चित सियासी फैसले
● मुलायम सिंह ने मुख्यमंत्री रहते हुए पीसीएस की परीक्षा से अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त की थी। इससे लाखों गरीब पिछड़े शिक्षित युवा उनके समर्थक बन गए।
● प्रदेश के शिक्षकों व कमर्चारियों को सीधे ट्रेजरी से पेंशन दिलाने का श्रेय भी उन्हें ही है। इससे 13 लाख पेंशनरों को राहत मिली।
● मुलायम ने मुख्यमंत्री के रूप में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया। इसको लेकर उन्हें तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा।
● रक्षामंत्री रहते हुए सुखोई लड़ाकू विमान खरीद को मंजूरी दी थी। शहीद सैनिकों के शवों को घर तक पहुंचाने का भी निर्णय लिया था।
● मुलायम ने मुख्यमंत्री रहते सबसे पहले यूपी से चुंगी को खत्म कराया। वह इसके पीछे भ्रष्टाचार को समझते थे

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