1920 के दशक की शुरुआत में एक छात्र भारत आया और यहां के कल्चर में ऐसा रमा-बसा कि उनकी कहानियों का केंद्र भारत और यहां के लोग हो गए. जब विदेशी साहित्य में भारतीय ट्रेन, महाराजा, बैरागी, बैल, पुलिसकर्मी दिखे तो लोगों को अचरज हुआ, मगर उस छात्र को भारत में संभावनाएं दिखीं और उन्होंने एक के बाद एक किताबें भारत को केंद्र में रखकर ही लिख डालीं.
यह छात्र थे लॉरेंस ब्लोचमैन, एक अमेरिकी जो अपनी पढ़ाई के दौरान मित्र के साथ भारत आए और कोलकाता में रहे, आए तो ये कुछ महीनों के लिए ही थे, लेकिन यहां आकर रम गए और लंबे समय तक यही रुके रहे. यहां एक इंग्लिश मैगजीन के लिए उन्होंने नौकरी की और इस दौरान जो अनुभव लिए उन्हें अपनी कहानियों और उपन्यास में उतारते रहे. आज उन्हीं लॉरेंस ब्लोचमैन का जन्मदिन है, जिनकी किताबें आज भी जासूसी के क्षेत्र में करियर बनाने की चाह रखने वालों को एक राह दिखाती हैं.
कौन थे लॉरेंस ब्लोचमैन?
लॉरेंस ब्लोचमैन का जन्म 17 फरवरी 1900 को कैलिफोर्निया में हुआ था. वह यहूदी वंश के थे. कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय बर्कले में उन्होंने पढ़ाई की. यहां वे एक छात्र पत्रिका के संपादक रहे. मई 1920 में वे जापान, चीन और हांगकांग की पहली यात्रा पर गए. यह यात्रा उन्होंने विवि के कोरल समूह के सदस्य के तौर पर शुरू की थी. कुछ महीनों बाद ही वह अपने दोस्त जॉन क्रेश्चमर के साथ सेन फ्रांसिस्को रवाना हुए. उन्हें कुछ दिन में ही लौटना था मगर वह तीन साल तक घूमते रहे. इसी यात्रा के बीच वे हिमालय के रास्ते भारत में दाखिल हुए. स्क्रॉल की एक रिपोर्ट के मुताबिक दोनों लंबे समय तक कोलकाता में रहे.
भारत में शुरू की नौकरी
ब्लॉचमैन ने भारत में नौकरी शुरू की और एक अंग्रेजी पत्रिका के फोटोग्राफर और फीचर लेखक बने. यहां से उन्हें अक्सर बाहर भेजा जाता था, इसके लिए उन्होंने ट्रेनों को अपनाया और रेलवे से इस तरह परिचित हुए कि 1934 में अपना सबसे सफल उपन्याय बॉम्बे मेल लिख डाला. इस पर बाद में इसी नाम से फिल्म भ बनी. इस उपन्यास का हीरो इंस्पेक्टर प्राइक था जिसने एक महाराजा समेत दो लोगों की हत्याओं को सुलझाया था.
यहां से जानी राजसी व्यवस्था
क्रेट्सचमर और ब्लोचमैन कुछ दिन के लिए महाराजा तुकोजी राव होलकर के मेहमान बनकर इंदौर गए. यहां उन्होंने राजघरानों का कल्चर देखा, कीमती रत्नों के बारे में जाने और अपनी कहानियों में बार-बार इनका जिक्र करते रहे. भारत से ब्लोचमैन अपने मित्र के साथ मिडिल ईस्ट होते हुए वापस गए. 1926 में उन्होंने मार्गुराइट से शादी कर ली. वह भारत को तो छोड़ गए लेकिन देश की छाप उन पर हमेशा के लिए बन गई.
थ्रिलर हीरो टेरेंस ओ रेली!
ब्लोचमैन की कहानियों का थ्रिलर हीरो टेरेंस ओ रेली था जो कहानियों में न्यूयॉर्क के एक पुलिसकर्मी की भूमिका में होता था. वह बहुत ही इंटेलीजेंस और चतुर था, जो भारतीय राजकुमार के साथ उनके सिक्योरिटी मार्शल के तौर पर भारत आया था. यह एक काल्पनिक पात्र था जो लगातार उनकी लघु कथाओं और उपन्यासों में रहा. 1950 से ब्लोचमेन ने एक जासूसी जोड़ी पर कहानियां लिखनी शुरू कीं. इनमें एक पात्र न्यूयॉर्क का जीव विज्ञानी डैनियन वेबस्टर और दूसरा भारतीय सहयोगी मोतीलाल मुखर्जी था. 1975 में ब्लोचमैन का निधन हो गया. हालांकि अपने जीवनकाल में उन्होंने जो जासूसी पुस्तकें लिखीं वे एक ऐसी नजीर बन गईं जो हमेशा अमर रहेंगीं.