भारत में 57% ग्रेजुएट नौकरी के काबिल नहीं, जानें किस राज्य में कितने?

किसी की देश के युवा और उनकी काबिलियत एक पावर हाउस की तरह होती है. युवाओं की काबिलियत और ऊर्जा से ही किसी देश का भविष्य चनकता है. अगर किसी भी कारण से ये युवाओं की काबिलियत कम हो जाए तो देश के विकास की संभावनाओं में पावर कट आ जाता है. देश का भविष्य एक तरह से अंधेरे में जा सकता है. आज हम युवाओं की काबिलियत की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भारत के युवाओं की काबिलियत से जुड़ी एक नई रिपोर्ट आई है.

ये रिपोर्ट बताती है कि देश में आधे से ज्यादा ग्रेजुएट युवाओं में स्किल वाला संकट है. जिससे उनके लिए रोजगार वाला संकट भी बढ़ रहा है. इंडियाज ग्रेजुएट स्किल्स इंडेक्स 2025 के मुताबिक देश में आधे से ज्यादा ग्रेजुएट युवाओं के पास नौकरी पाने की काबिलियत नहीं है. सोच कर देखिए ग्रेजुएट करने वाले आधे से ज्यादा युवाओं के पास वो कौशल ही नहीं जो उन्हें नौकरी दिला सके.

इस रिपोर्ट के मुताबिक करीब 57 प्रतिशत ग्रेजुएट नौकरी पाने के योग्य नहीं है. इस लिहाज से सिर्फ 43 प्रतिशत युवा ही नौकरी के काबिल पाए गए हैं.
हांलाकि पिछले साल ये आंकड़ा 44 प्रतिशत से ज्यादा था. पिछले साल की तुलना में इस साल नौकरी के काबिल ग्रुजेएट की संख्या कम हुई है.
इसकी वजह ये है कि ग्रेजुएट करने वाले नए युवाओं से बेहतर स्किल्स की उम्मीद थी, लेकिन आधे से ज्यादा ग्रेजुएट उन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सके.

स्किल्स के मामले में अंतर बड़ा नहीं

देश के 10 लाख ग्रेजुएट छात्रों पर ये स्टडी की गई थी. जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता और इंडस्ट्री की मांग के हिसाब से स्किल्स को आंका गया. बेरोजगारी दर के आंकड़ों में पुरूष और महिलाओं में बेशक बड़ा अंतर हो, लेकिन स्किल्स के मामले में ये अंतर ज्यादा नहीं है. इस रिपोर्ट के मुताबिक 43 प्रतिशत पुरूष तो 42 प्रतिशत महिला ग्रेजुएट्स नौकरी के काबिल हैं.

चिंता कि बात ये है कि AI वाले इस दौर में AI और डाटा साइंस जैसे क्षेत्रों में काम करने के लिए सिर्फ 46 प्रतिशत ग्रेजुएट ही योग्य हैं. वैसे इस रिपोर्ट में जो चौंकाने वाली बात है, वो ये कि काबिल ग्रुजेएट्स के मामले में उत्तर भारत के राज्य दक्षिण भारतीय राज्यों से कहीं आगे हैं.

काबिल ग्रेजुएट्स में दिल्ली नंबर वन

सबसे ज्यादा काबिल ग्रेजुएट्स के मामले में दिल्ली पहले नंबर पर है, जहां 53 प्रतिशत से ज्यादा युवा नौकरी के काबिल पाए गए. जिसके बाद पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड के ग्रेजुएट्स नौकरी के लिए सबसे ज्यादा काबिल है. टॉप टेन लिस्ट में दक्षिण भारत का सिर्फ एक राज्य तेलंगाना शामिल है, जो दसवें स्थान पर है

यानी साक्षरता के मामले में दक्षिण भारत के कई राज्य बेशक आगे हो, लेकिन स्किल्स के मामले में उत्तर भारत के ग्रेजुएट्स कहीं आगे हैं. वैसे ये रिपोर्ट चिंता का अलार्म है. युवा वर्क फोर्स के दम पर हम विकसित भारत का सपना देख रहे हैं. लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश में अनस्किल्ड युवाओं की संख्या भी तेजी से बढ़ती रहेगी. और उनके रोजगार का संकट देश के विकास की गति में स्पीड ब्रेकर बन सकता है. इसलिए इस तरह की स्टडी को सुधार के एक अवसर की तरह देखना चाहिए.