भारत के संविधान के रचयिता डॉ. भीमराव अंबेडकर को लोग बाबासाहेब नाम से भी बुलाते हैं. जब भी आजाद भारत की बात होती है और संविधान का नाम आता है वहां पर सबसे पहले उन्ही का नाम लिया जाता है. अगस्त 1947 में भारत के आजाद होने के बाद अंबेडकर को संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. भारतीय संविधान में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है. 31 मार्च वही दिन है जिस दिन मरणोपरांत बाबासाहेब अंबेडकर को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया था. चलिए जानते हैं कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने जीवन में शिक्षा के क्षेत्र में किस-किस विषय में पढ़ाई की थी और कौन-कौन सी जगहों पर उन्होंने अपना छात्र जीवन बिताया था.
14 अप्रैल 1891 को भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था. उनके पिता रामजी मालोजी सकपाल ब्रिटिश सेना में सूबेदार थे. अंबेडकर ने अपनी शुरुआती पढ़ाई महाराष्ट्र के सतारा में एक कैंप स्कूल से की थी. 1900 में उनका एडमिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल में पहली कक्षा में हो गया था. जिसके बाद उन्होंने यहीं से शिक्षा पूरी की. इसके बाद वह मुंबई चले गए और वहां पर उन्होंने सेकेंडरी एजुकेशन पूरी की. अंबेडकर ने मुंबई के एलफिंस्टन हाई स्कूल से पूरी की.
मुंबई से की हाई स्कूल और ग्रेजुएशन
पढ़ाई के दौरान डॉ. भीमराव अंबेडकर को इस बात का अहसास हो गया था कि इस देश में छुआछूत की जड़ें बहुत गहरी हैं. हालांकि वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे. हाई स्कूल पूरी करने के बाद उन्होंने एलफिन्स्टन कॉलेज में एडमिशन लिया और वहां से ग्रेजुएशन पूरी की. इसके लिए उन्हें बड़ौदा के तत्कालीन महामहिम सयाजीराव गायकवाड़ से छात्रवृत्ति मिली थी. छात्रवृत्ति के अनुबंध के मुताबिक वह बड़ौदा गए और काम करने लगे.
अमेरिका में की मास्टर्स-पीएचडी
1913 में अमेरिका जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों में डॉ. अंबेडकर को चुना गया. यही चयन उनके शैक्षणिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था. 1915-16 में उन्होंने एमए और पीएचडी की डिग्री हासिल की. पीएचडी करने के बाद भी अंबेडकर रुके नहीं और आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने लंदन का रुख किया. लंदन में उन्होंने वकालत की पढ़ाई की और उन्हें ब्रिटिश सरकार की ओर से लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस में डी.एससी. की तैयारी की परमिशन भी दी गई. उन्होंने कुछ समय बाद बार एट लॉ और डी.एससी. की डिग्रियां भी हासिल कर लीं.
युवाओं के प्रेरणास्त्रोत
डॉ. भीमराव अंबेडकर हर उस भारतीय के लिए एक प्रेरणास्त्रोत हैं जो अपनी परिस्थितियों से परेशान हैं और आगे बढ़ने के सपने देख रहा है. उन्होंने विषम परिस्थितियों के बावजूद कई मुकाम हासिल किए और इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए अमर कर दिया. इतनी पढ़ाई करने के बाद अंबेडकर जर्मनी भी गए थे जहां उन्होंने बॉन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया और वहां भी पढ़ाई की.