पवन जैन ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के शैक्षिक और औद्योगिक विकास में अहम योगदान दिया है. 2007 में मंगलायतन यूनिवर्सिटी की स्थापना करके हायर एजुकेशन के क्षेत्र में क्षेत्र में विकास की मुख्य धारा में ला दिया. उनका जीवन विभिन्न पहलुओं से भरा रहा. जिसमें बिजनेस, शिक्षा, और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. पवन जैन का दिसंबर 2021 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था लेकिन आज भी उन्हें अलीगढ़ में सम्मान के साथ याद किया जाता है.
पवन जैन का जन्म 11 दिसंबर 1951 को बुलंदशहर में हुआ था. उनके पिता कैलाश चंद्र जैन एक आध्यात्मिक गुरु थे और मां विमला गृहणी थीं. अलीगढ़ में बसने से पहले पवन जैन ने अपने करियर की शुरुआत 1970 के दशक में की थी, जब वे अखबारों में काम कर रहे थे. इसके बाद उन्होंने 1971 में पत्नी आशा जैन के नाम पर आशा इंजीनियरिंग वर्क्स की शुरुआत की और फ्यूल कॉक असेंबलिंग का काम शुरू किया.
इसके अलावा पवन जैन का व्यवसायिक जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा हुआ था. 1973 में उन्होंने कृष्णापुरी में किराए के मकान में ताला फैक्ट्री की शुरुआत की और 1981 में गोपालपुरी में एक फैक्ट्री स्थापित की. इसके साथ ही उन्होंने 1998 में दिल्ली पब्लिक स्कूल की फ्रेंचाइजी लेकर डीपीएस अलीगढ़ की स्थापना की. पवन जैन का ध्यान सिर्फ व्यापार पर नहीं था बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया.
2007 में बनाई यूनिवर्सिटी
2007 में मंगलायतन यूनिवर्सिटी की स्थापना की जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई. पवन जैन का मानना था कि शिक्षा के बिना किसी भी समाज की उन्नति संभव नहीं है. यही कारण था कि उन्होंने एक ऐसी यूनिवर्सिटी की नींव रखी जो छात्रों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का भी पाठ पढ़ाए. इसके अतिरिक्त पवन जैन ने सन 2000 में तीर्थधाम मंगलायतन की स्थापना भी की. यहां उन्होंने आध्यात्मिक दृष्टिकोण से भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए और 2003 में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत की थी.
बिजनेस के साथ-साथ समाज सेवा भी
पवन जैन के बारे में पावना ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के लोग बताते हैं कि उनका जीवन व्यवसाय और समाज सेवा का बेहतरीन उदाहरण है. वे न सिर्फ एक कुशल व्यवसायी थे बल्कि एक शिक्षाविद और समाजसेवी भी थे. पवन जैन का योगदान अलीगढ़ के विकास में अविस्मरणीय रहेगा. खासकर शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में.